भारत नहीं, इस देश में है दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर
12वीं सदी का चमत्कार, जिसकी दीवारों पर आज भी जीवंत है रामकथा
जब भी दुनिया के भव्य हिंदू मंदिरों की बात होती है, तो आमतौर पर हमारा ध्यान भारत की ओर चला जाता है। अयोध्या का नव-निर्मित राम मंदिर, काशी विश्वनाथ, मीनाक्षी अम्मन मंदिर या तिरुपति बालाजी—ये सभी हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर भारत में नहीं, बल्कि समुद्र पार एक देश में स्थित है।
यह अद्भुत मंदिर है अंकोर वाट (Angkor Wat), जो कंबोडिया में स्थित है और आज भी भारतीय संस्कृति, हिंदू दर्शन और प्राचीन वास्तुकला की महानता का जीवंत प्रमाण है।
400 एकड़ में फैला भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर
अंकोर वाट केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि लगभग 400 एकड़ में फैला एक विशाल धार्मिक परिसर है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक माना जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और इसका आकार, संरचना और भव्यता इसे अद्वितीय बनाती है।
इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी की शुरुआत में खमेर साम्राज्य के शक्तिशाली राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने करवाया था। उस समय खमेर साम्राज्य दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे समृद्ध और शक्तिशाली सभ्यताओं में से एक था।
पत्थरों पर उकेरी गई रामायण और महाभारत
अंकोर वाट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दीवारों पर की गई अद्भुत नक्काशी है। मंदिर की दीवारें केवल सजावट नहीं हैं, बल्कि वे कहानी कहती हैं।
यहाँ आप देख सकते हैं:
रामायण (रामकथा) के प्रमुख प्रसंग
महाभारत के युद्ध दृश्य
समुद्र मंथन का विस्तृत चित्रण
देवताओं और असुरों के संघर्ष
इन शिल्पकथाओं को इतनी बारीकी और जीवंतता से उकेरा गया है कि लगता है जैसे पत्थर बोल रहे हों। यही कारण है कि अंकोर वाट को अक्सर “पत्थरों में लिखी महाकाव्य गाथा” कहा जाता है।
हिंदू मंदिर से बौद्ध स्थल तक का सफर
इतिहास के साथ-साथ अंकोर वाट का धार्मिक स्वरूप भी बदलता रहा। शुरुआत में यह पूरी तरह एक हिंदू मंदिर था, लेकिन बाद के समय में जब कंबोडिया में बौद्ध धर्म का प्रभाव बढ़ा, तो यह स्थल बौद्ध पूजा केंद्र के रूप में भी इस्तेमाल होने लगा।
इसके बावजूद, मंदिर की मूल हिंदू पहचान, भगवान विष्णु की प्रतिमाएं और रामायण-महाभारत की कथाएं आज भी इसकी दीवारों पर स्पष्ट रूप से मौजूद हैं।
कंबोडिया की पहचान बना अंकोर वाट
अंकोर वाट केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं है, बल्कि यह कंबोडिया की राष्ट्रीय पहचान बन चुका है।
यह मंदिर कंबोडिया के राष्ट्रीय ध्वज पर भी अंकित है
इसे UNESCO विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है
हर साल लाखों पर्यटक इसे देखने आते हैं
यह तथ्य अपने आप में इस मंदिर के महत्व और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रभाव
अंकोर वाट इस बात का जीवंत प्रमाण है कि प्राचीन भारत की संस्कृति, धर्म और दर्शन का प्रभाव केवल भारतीय उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं था। रामायण और महाभारत जैसी कथाएं समुद्र पार देशों तक पहुँचीं और वहाँ की सभ्यताओं का हिस्सा बन गईं।
आज भी, कंबोडिया जैसे देश में स्थित यह मंदिर भारत की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरव के साथ प्रस्तुत करता है।
क्यों जाएँ अंकोर वाट?
अगर आप विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं और ऐसी जगह देखना चाहते हैं जहाँ:
इतिहास की भव्यता हो
वास्तुकला का जादू हो
और धर्म की गहरी जड़ें हों
तो अंकोर वाट आपके लिए एक आदर्श गंतव्य है। यह स्थान न केवल देखने लायक है, बल्कि महसूस करने योग्य भी है।


